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दुर्मिळ योगायोगांमुळे संवत २०८२ तयार होत आहे

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आज भी कांई प्रासंगिक हैं रामायण अर महाभारत। विशाल गुप्ता@सनातन यात्रा. रामायण अर महाभारत भारतीय इतिहास अर साहित्य का घणा बड़ा आधार स्‍तंभ हैं, जो मानवता का सांस्कृतिक अर आध्यात्मिक ताना-बाना में गहरी रीत स्यूं बंधा हुआ हैं। हज़ारों सालां पहलै रचा गया ई महाकाव्य केवल पौराणिक कथा स्यूं बाहर हैं। ई नैतिक समझ, दार्शनिक विचार अर मानवी भावनाओं का जटिल नाच का भरा हुआ खजाना हैं। आज का घणा जुड़ा हुआ पण नैतिक रीत स्यूं अनिश्चित संसार में, ई पुराणी कथा स्थायी सबक दे हैं जो घणी प्रासंगिक लाग हैं।
आज भी कांई प्रासंगिक हैं रामायण अर महाभारत।
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